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Jai Prakash Pandey

Abstract

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Jai Prakash Pandey

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जीवन संघर्ष

जीवन संघर्ष

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कितनी बार परीक्षा लोगे, 

कितना कर्ज चुकाना होगा, 

कुछ तो दर्द मिटाना होगा,  


फर्ज भी तो हमें निभाना होगा,

रूठों को हमें ही मनाना होगा, 

कितनी और परीक्षा लोगे।। 


कुछ रिश्ते बनकर टूट गए, 

कुछ जुड़ते -जुड़ते छूट गए, 

जख्मों को अभी मिटाना होगा, 


जीवन की पहेली सुलझाना होगा, 

कितनी और परीक्षा लोगे, 

कितनी बार बताना होगा। 


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