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JAYANTA TOPADAR

Inspirational

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JAYANTA TOPADAR

Inspirational

जीवन-रहस्य

जीवन-रहस्य

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ये जीवन-चक्र है कैसी उधेड़बुन ...?

कोई पार न पाया !

जो इस जहाँ में आया,

वो एकदिन गया ...


इस दौलत-ओ-शोहरत की अंधाधुंध दौड़ ...

बेइंतहा खालीपन, मगर फिर भी नुमाइश

अपने रुतबे की ...!

क्या लेकर आए थे, जो यहाँ

तिजोरियाँ भर-भर कर 

दूसरों से छुपाते फिरते हो ...?


ये जीवन तो पानी का बुलबुला है,

यहाँ क्या जमाखोरी और क्या पूंजीवादी चिंताधारा ...!

उस पार तो सिर्फ चिरशांति है --

न कोई तामसिक प्रतिस्पर्धा

और न ही "मैं! मैं!" की रट लगाना ...


इस जहाँ से उस जहाँ तक

चलते जाने का

ये सिलसिला तो पुराना है...!

यहाँ सिर्फ मानव- शरीर बदला करता है,

आत्मा को तो एक और

नूतन वस्त्र धारण करने का

एक नया अवसर मिलता है...।



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