STORYMIRROR

Ratna Kaul Bhardwaj

Inspirational

4  

Ratna Kaul Bhardwaj

Inspirational

जीवन -मरण

जीवन -मरण

1 min
432

पंच तत्व की इस देह पर

क्यों है इतना इतराना

मिट्टी की बनी है यह काया

मिट्टी में है मिल जाना


अद्धभुत रूप से इसे बनाया

ईश्वर रूपी शिल्पकार ने

एक अंश जिसने सांसे बक्शी

है वह आत्मा का बसेरा होना


आत्मा का यह अनूठा रहस्य

है आध्यात्मिक पूर्ण रूप से

पुनरावर्तन की प्रतिक्रिया से

निरंतर इसका गुज़र जाना


निभाते है पात्र अपनी अपनी भूमिका

विधाता के रचे इस खेल में

इस रंग मंच का पूरा निरंतन

है विधाता की मुट्ठी में होना


थककर जब महानिन्दरा की

आगोश में हम सो जाते हैं

मृत्यु के रूप में उस पात्र की

भूमिका का होता है अंत होना


कर्म फलों का आंकलन

यह चक्र है जन्म जन्मों का

पुराना चोला त्याग कर

नया चोला धारण करना


रात्रि के गर्भ में जैसे

नया दिन का उदय होता है

वस्तुतः मृत्यु की कोख में जाना

है नए अध्याय का प्रारंभ होना


मनुष्य स्वयं भाग्य निर्माता है

इच्छानुसार कर्म कर सकता है

अनिवार्य है इंद्रियों का बस में रहना

और निष्ठा से अपनी भूमिका निभाना


जीवन मरण इस सृष्टि पर

एक ही तथ्य के दो पहलू है

जीवन है इस चक्र को स्वीकारना

मृत्यु, प्रभु चरणों में लौट जाना........



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational