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Anuradha Shrivastava

Abstract Romance Classics

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Anuradha Shrivastava

Abstract Romance Classics

जग सारा

जग सारा

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मैं लौट के तेरे लिए आया हूं तेरा ही होने

तेरा ही हूं तुझ से बिछड कर जाना ये मैंने


बिन तेरे नहीं कहीं कोई आसरा मेरा

तुझ संग ही हैं जग सारा आशना मेरा


तेरे संवरने से मैं भी संवर जाता हूं

तेरे संग संग से में भी निखर जाता हूं


जीवन में रंग सारे बिखेरता वजूद तेरा

तू ही आसमां मेरा तू ही चांद मेरा।


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