STORYMIRROR

Anuradha Shrivastava

Abstract Romance Classics

4  

Anuradha Shrivastava

Abstract Romance Classics

जग सारा

जग सारा

1 min
335

मैं लौट के तेरे लिए आया हूं तेरा ही होने

तेरा ही हूं तुझ से बिछड कर जाना ये मैंने


बिन तेरे नहीं कहीं कोई आसरा मेरा

तुझ संग ही हैं जग सारा आशना मेरा


तेरे संवरने से मैं भी संवर जाता हूं

तेरे संग संग से में भी निखर जाता हूं


जीवन में रंग सारे बिखेरता वजूद तेरा

तू ही आसमां मेरा तू ही चांद मेरा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract