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Anuradha Shrivastava

Abstract Romance

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Anuradha Shrivastava

Abstract Romance

रहने दे

रहने दे

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व्याकुल है मन

 बांहों में रहने दे सनम


बिखरे है टूटकर 

डाली से हमदम


उड़ रहे हैं सूखे पत्ते से

इधर उधर हम


समेटना हैं तुम्हें

जल जाएंगे वरना हम


फैला है धुआँ

भस्म हो जाएंगे हम


जी रहे हैं हम तो तेरे 

इश्क़ में ही हमकदम




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