Anuradha Shrivastava
Abstract Romance
व्याकुल है मन
बांहों में रहने दे सनम
बिखरे है टूटकर
डाली से हमदम
उड़ रहे हैं सूखे पत्ते से
इधर उधर हम
समेटना हैं तुम्हें
जल जाएंगे वरना हम
फैला है धुआँ
भस्म हो जाएंगे हम
जी रहे हैं हम तो तेरे
इश्क़ में ही हमकदम
बुद्ध हुए बिन...
कहां आसान होत...
रंग लाल
कुछ मीठा हो ज...
इश्क का
इश्क असली
रहने दे
बदलता मौसम
चांद
कुछ पल
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कल तुम पर आरोप लगेगा। शीश आपका स्वयं झुकेगा। औलादें जब देंगी ताना। कल तुम पर आरोप लगेगा। शीश आपका स्वयं झुकेगा। औलादें जब देंगी ताना।
याद रहेगा बस वही, जो पावन साहित्य। लोगों के दिल में सदा, है बन चमके आदित्य।। याद रहेगा बस वही, जो पावन साहित्य। लोगों के दिल में सदा, है बन चमके आदित्य।।
हौसलों की उड़ान में,इरादों को मकसद बनाकर तो देखो। प्रगति पथ पर तुम, हिम्मत से कदम उठाकर तो देखो। ... हौसलों की उड़ान में,इरादों को मकसद बनाकर तो देखो। प्रगति पथ पर तुम, हिम्मत से ...
शिव शंकर को हम करें, बारंबार प्रणाम। माँ गौरा संग में बढ़ी, जिनकी शक्ति ललाम।। शिव शंकर को हम करें, बारंबार प्रणाम। माँ गौरा संग में बढ़ी, जिनकी शक्ति ललाम।...
फिर मत कहना, समय रहते ... मैंने कहा नहीं ! फिर मत कहना, समय रहते ... मैंने कहा नहीं !
तमाम शहर बना बैठा है रकीब हमारा यहाँ तेरा पता हमें बताता कौन है तमाम शहर बना बैठा है रकीब हमारा यहाँ तेरा पता हमें बताता कौन है
इक अनोखी चुभन होगी, किसी की जिंदगी को जानकर आंसू भी आ जाएंगे आँखों में, उस दर्द को अपना मानकर । इक अनोखी चुभन होगी, किसी की जिंदगी को जानकर आंसू भी आ जाएंगे आँखों में, उस दर्द ...
क्यों की न हम कभी सृष्टि को कुछ दे पाये हैं, और न कभी कुछ दे पायेंगे और न कभी कुछ दे पायेंगे ! क्यों की न हम कभी सृष्टि को कुछ दे पाये हैं, और न कभी कुछ दे पायेंगे और न कभी...
अब लगाव की चाहना, रखते हैं हम लोग। काम लगे तब मिल सके, यथा समय सहयोग। अब लगाव की चाहना, रखते हैं हम लोग। काम लगे तब मिल सके, यथा समय सहयोग।
तुम! 'तुम' होकर कब लौटोगे...? तुम! 'तुम' होकर कब लौटोगे...?
देखो कैसे झरता है हरसिंगार फूलता है मोगरा फिर-फिर हर बार देखो कैसे झरता है हरसिंगार फूलता है मोगरा फिर-फिर हर बार
नदी-सा बहना सीखो कहते चतुर सयाने, पर बहाव में ही अस्तित्व कोई यह न माने... नदी-सा बहना सीखो कहते चतुर सयाने, पर बहाव में ही अस्तित्व कोई यह न माने...
अपनो का साथ ले जाता था दुखों को बहाके।।।।।।।। हवाओं में गूंजते बुआ और चाची के ठहाके अपनो का साथ ले जाता था दुखों को बहाके।।।।।।।। हवाओं में गूंजते बुआ और चाची के ठ...
तमाम उम्र मेरा दम उसी धूँए मे घुटा- वो इक चिराग था मैने उसे बुझाया है। तमाम उम्र मेरा दम उसी धूँए मे घुटा- वो इक चिराग था मैने उसे बुझाया है।
रिश्तों के आधार की, दरक रही है नींव। समय चक्र के खेल में, भटक गए सब जीव।। रिश्तों के आधार की, दरक रही है नींव। समय चक्र के खेल में, भटक गए सब जीव।।
ए `प्राण` बुढापे का निरादर नहीं करना इक रोज़ हरिक शख्स को आता है बुढ़ापा। ए `प्राण` बुढापे का निरादर नहीं करना इक रोज़ हरिक शख्स को आता है बुढ़ापा।
इस समय त्योहारों का मौसम चल रहा है पर साथ ही लोकतंत्र का भी। इस समय त्योहारों का मौसम चल रहा है पर साथ ही लोकतंत्र का भी।
लड़ते -लड़ते हो रहे, दोनों ही कंगाल। भला समझता कौन है, कलयुग का जंजाल।। लड़ते -लड़ते हो रहे, दोनों ही कंगाल। भला समझता कौन है, कलयुग का जंजाल।।
आज भी वे कविताएं अपनी गूँज लिए रसोई में रहती हैं जहाँ माँ कविता बनाया करती थी। आज भी वे कविताएं अपनी गूँज लिए रसोई में रहती हैं जहाँ माँ कविता ...