जब तक चलेगा यह सफ़र
जब तक चलेगा यह सफ़र
तय है मुश्किलों का आना,ये तो हमारे जीवन का हिस्सा है,
सुख दुख में है जीना, यही जीवन के उपवन का किस्सा है।
ज़रूरी तो नहीं, जीवन का ये सफ़र सुहाना ही हो हर पल,
आज खुशियों का वसंत तो पतझड़ भी हो सकता है कल।
ग़म के बादल जब छटेंगे, तो खुशियों की बारिश भी होगी,
ज़िंदगी का सफ़र है, थोड़ी मर्जी थोड़ी गुज़ारिश भी होगी।
चलना है इन सब के साथ हमें, जब तक चलेगा यह सफ़र,
खुद को अंँधेरों में न कैद करना कभी मुश्किलों से हारकर।
भटक जाते हैं रास्ते अक्सर, जो रहते हैं अंँधेरों से डरकर,
उजाला मिलता है ज़रूर देखना उम्मीदों के दीए जलाकर।
मुश्किलें यूंँ ही हल नहीं होती, यहाँ संघर्ष करना पड़ता है,
नाउम्मीदी के बुझे हुए चिरागों को, फिर जलाना पड़ता है।
आसान होगी गर ज़िंदगी की राहें तो मज़ा कहांँ है जीने में,
दुःख है यहांँ तभी तो आनंद आता, सुख का जाम पीने में।
पांँव तुम्हारे रोकने वाले, बहुत मिलेंगे जीवन के सफ़र में,
कोशिश करेंगे हराने की, पर चलते रहना अपनी डगर में।
हौसला, हिम्मत है गर दिल में फिर तूफ़ानों से क्या डरना,
मन में है उजाला तो आसान है राहों को भी रोशन करना।
मुश्किलें हैं तभी तो हमें हमारी शक्तियों का आभास होता,
इन सबसे ही तो खुद को निखारने का अवसर भी मिलता।
अंँधेरा रोज़ निगलता सूरज को वो कभी हिम्मत ना खोता,
विश्वास है तभी तो हर सुबह अपनी जीत का जश्न मनाता।
मुश्किलों से क्या डरना, वक़्त के साथ सब गुज़र जाता है,
जो हिम्मत से बढ़े आगे, वो बिखर कर भी निखर जाता है।
ज़िंदगी को जीना ज़रूरी है सफ़र तो हर कोई पूरा करता है,
खट्टे मीठे नए अनुभवों में जीना ही तो ज़िंदगी कहलाता है।
जैसे एक पौधे को धूप छांँव दोनों की जरूरत बढ़ने के लिए,
वैसे ही सुख दुःख दोनों ज़रूरी है, ये ज़िन्दगी जीने के लिए।
आगे बढ़ने के लिए तो करना ही पड़ता है,मुश्किलों का पार,
इसलिए सफ़र के इम्तिहानों को, सहज करते चलो स्वीकार।
