Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF
Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF

निखिल कुमार अंजान

Abstract


2  

निखिल कुमार अंजान

Abstract


जाहिल.....

जाहिल.....

1 min 296 1 min 296

कोख मे होने पर ही बवाल हो गया

मासूम की मासूमियत पर देखो देखो

बिटिया होने के कारण सवाल हो गया

गर्व से कहते हैं सब को हम देखो देखो

कितना गौरवशाली इतिहास हमारा है

देवी देवताओं की इस पावन धरा पर

आज भी समझते है हम कि सिर्फ 

नारी की अस्मत पर अधिकार हमारा है

बेशक भूर्ण हत्या पर रोक लगा ली हमने

लेकिन जो पैदा हो गई है हमारे बीच

उनको अपनी संकीर्ण सोच से मारा है

इक दिन जीवन का मार्ग बनाने वाली

मिट जाएगी रौब चलाएगा किस पर

तेरा अस्तित्व ही संकट मे आ जाएगा

नर नारी मे भेद करने वाले तू क्या भला

विकास की दौड़ लगाएगा

रहने दे अपने आप को बुद्धिमान कहने वाले

तू तो जाहिल का जाहिल ही रह जाएगा


Rate this content
Log in

More hindi poem from निखिल कुमार अंजान

Similar hindi poem from Abstract