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निखिल कुमार अंजान

Abstract

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निखिल कुमार अंजान

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जाहिल.....

जाहिल.....

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कोख मे होने पर ही बवाल हो गया

मासूम की मासूमियत पर देखो देखो

बिटिया होने के कारण सवाल हो गया

गर्व से कहते हैं सब को हम देखो देखो

कितना गौरवशाली इतिहास हमारा है

देवी देवताओं की इस पावन धरा पर

आज भी समझते है हम कि सिर्फ 

नारी की अस्मत पर अधिकार हमारा है

बेशक भूर्ण हत्या पर रोक लगा ली हमने

लेकिन जो पैदा हो गई है हमारे बीच

उनको अपनी संकीर्ण सोच से मारा है

इक दिन जीवन का मार्ग बनाने वाली

मिट जाएगी रौब चलाएगा किस पर

तेरा अस्तित्व ही संकट मे आ जाएगा

नर नारी मे भेद करने वाले तू क्या भला

विकास की दौड़ लगाएगा

रहने दे अपने आप को बुद्धिमान कहने वाले

तू तो जाहिल का जाहिल ही रह जाएगा


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