इश्क़ अंज़ाम
इश्क़ अंज़ाम
याद आएं अगर एक पैगाम दो,
नाम लेकर मेरा इश्क़ अंजाम दो।
प्यार में जब कभी तुम तड़पने लगो
हिचकियों को सदा तुम मेरा नाम दो।
छोड़ दो क्या जमाना कहेगा यहाँ,
दिल सुकूँ जो मिले रोज आराम दो।
हम तुम्हें चाहते इस कदर हैं सनम,
चैन खोता हूँ हर दिन जरा शाम दो।
मौत जो गर लिपट जाएगी बाँह में,
तब प्रियम को तिरंगा कफ़न दाम दो।

