इश्क़ नहीं देखता।
इश्क़ नहीं देखता।
इश्क़ नहीं देखता, अच्छा है या बुरा,
स्वभाव मृदुल ही, या बहुत बुरा भी।
इश्क़ रब दूजा है, तो इबादत करना,
रब की पूजा करते, घृणा ना करना।
कमबख़्त इश्क़ ही, सबसे बड़ी बला,
इश्क़ करना ज़रूरी, बहुत है ज़रूरी।
दीदार-ए-यार करते, पहले हम रोज़,
अब वो ख़फ़ा बहुत, दिखती न रोज़।
हमने इश्क़ किया है, सज़ा भुगत रहे,
शायद जुर्म किया है, सज़ा भुगत रहे।
प्यार जब होता हमें, रुलाता हमें भी,
कभी ना प्यार यारों, सच्चा मिला हमें।
