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Dr Mahima Singh

Inspirational

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Dr Mahima Singh

Inspirational

इस दिवाली चाहूं उपहार यही

इस दिवाली चाहूं उपहार यही

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हे राम 

इस दिवाली भी मुझे तुमसे उपहार चाहिए,

वैसे तो तेरे उपकार किसी उपहार से कम नही हैं,

पर मेरी तो जिद्द हेै,

उपहार के लिए।

इस दीवाली मैं चाहूं ,

तुझसे ऐसी बुद्धि दे ,

सबके मन से ईष्र्या राग द्वेष मिटा सकूं। 

अन्न ऐसा मिलें की कोई भी भूखा ना सोए।

मिठाई ऐसी खिला दे मेरे जीवन में मिठास घुल जाए

और जब भी मै बोलू मेरे कंठ से मीठा सुरीला स्वर ही निकले।

वसन ऐसे पहना दे तन के साथ मन के अहम को भी ढक दे।

पटाखे की बात ही क्या,

फुलझड़ी ऐसी कि जीवन में उजियारा कर दे।

रंगोली के रंग ऐसे दो सब मिलकर एक हो जायें ।

दीप ऐसे जले की हर मन के 

अंतस का तम हर ले दीपक का आलौकिक प्रकाश।

हर दिन हो शुभ दीप उत्सव जैसा चाहूं यही उपहार मेरे राम।



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