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ritesh deo

Abstract

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ritesh deo

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इरादा

इरादा

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एक इरादा लिए फिर रहा हूं,

इस धोखेबाज दुनिया में,

एक वादा लिए फिर रहा हूं !


तलाश है मुझे इक अजनबी की,

जो आकर बदल दे मेरी ज़िंदगी,

उसे अपने डोर में बांधने के लिए,

एक धागा लिए फिर रहा हूं !


मुझे ख़ुद पर है विश्वास जितना,

उतना ही उस अजनबी को मुझ पर हो,

इसी आस से हर वक्त,,

अपने अटूट बंधन के लिए

दुआ करते फिर रहा हूँ...!


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