STORYMIRROR

Chitra Yadav

Abstract

2  

Chitra Yadav

Abstract

इंतजार

इंतजार

1 min
249

दिल के नशेमन में

चराग कुछ मद्धम से हैं

हवाओं के मद्धम साज़ पर

चिलमनों के थिरकते साये, और

हसरतों की महकती सांसों की

है ज़ुम्बिश भी...

लगता है तेरा इंतज़ार

सुस्ता रहा है यहां कहीं..!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract