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Neeraj pal

Abstract

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Neeraj pal

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इंतजार

इंतजार

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तड़प रहा तुमसे मिलने को, पता नहीं कब ख्वाहिश पूरी होगी।

 बिताये उन लम्हों को याद कर, कब तलक यह दूरी कम होगी।।


 मैं ठहरा जन्मों का अपराधी, गुनाहों भरा है दिल हमारा।

 जब-जब मिलन की आस जगी, कर ना सका दीदार तुम्हारा।।


 प्रेम का जादू ऐसा होता, समझ ना सका अज्ञानवश।

 वशीकरण मंत्र तुम्हारा, करता रहा मिलने को बेबस।।


 गुरु कृपा बिन सुलभ न कुछ भी, तुमने ही तो समझाया।

 कैसे हो मुझ पर यह कृपा, यह सोच मन मेरा घबराया।।


 "इंतजार" में जो मजा है, लगता जैसे कोई सजा है।

  शबरी ने भी इंतजार में, प्रभु को मजबूर किया है।।


 थामा है दामन अगर तुम्हारा, जीवन है सिर्फ तुम्हारा।

" नीरज" बैठा इस इंतजार में, कभी तो पिघलेगा हृदय तुम्हारा।।


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