इंतज़ार का दर्द
इंतज़ार का दर्द
तेरी यादों की बारिश में भीग रहा हूँ,
तेरी याद के साए में जी रहा हूँ।
जो कभी था पास मेरे, वो अब दूर है,
फिर भी तेरे लौट आने का इंतज़ार कर रहा हूँ।
रातों को जागूँ, चाँद से पूछूँ,
क्या उसने तुझे देखा है कहीं?
हवाओं से कहूँ, तेरा पता लाएँ,
पर हर जवाब बस खामोशी ही रही।
ख़त लिखे थे तुझ तक पहुँचने के लिए,
पर शायद हवाओं ने जला दिए होंगे।
तेरे बिना जो पल बिताए मैंने,
वो खुदा ने भी गिना नहीं होंगे।
दिल चाहता है तुझसे फिर बातें करें,
तेरी हँसी की वो गूँज सुने।
पर तक़दीर ने शायद यही लिखा है,
कि तुझे सोचकर बस आँसू बहे।
अगर कभी लौटे तो देखना,
मैं वहीं खड़ा मिलूँगा तेरा इंतज़ार करते।
बस तुझसे एक आखिरी सवाल पूछूँगा,
क्या तुझे भी कभी मेरी यादें सताती हैं?
