प्यार की राह
प्यार की राह
सांसों की सरगम में बजती रही,
एक धुन अनजानी, मधुर, सजीव।
पलकों के कोनों में भीगती रही,
कोई कहानी, कोई अजीब…
चल पड़े थे जिस राह पे हम,
वो काँटों से खाली न थी।
हर मोड़ पर इक सवाल खड़ा,
हर कदम पे मुश्किल नई।
कभी चाँदनी सी शीतल लगी,
कभी आग बनके जलाने लगी।
कभी सुकून था पलकों तले,
कभी ख़्वाब भी रुलाने लगे।
कुछ दूर चले, साथ में हँसे,
फिर दर्द की बारिश में भीग गए।
जो कल तलक थे साए सरीखे,
आज धुंध में जाने क्यों खो गए?
प्यार की राह आसान कहाँ,
हर मोड़ पे इक इम्तिहान खड़ा।
जो पार कर ले ये दर्द-ओ-ग़म,
वही होता सच्चा, वही होता बड़ा।
तो चलो, फिर से इक दीप जलाएँ,
इस राह को अपने इश्क़ से सजाएँ।
कभी गिरें, कभी संभलें मगर,
इस सफ़र को यूँ ही निभाएँ...

