STORYMIRROR

कवि धरम सिंह मालवीय

Romance

4  

कवि धरम सिंह मालवीय

Romance

इन्तहा हो गई इंतजार की

इन्तहा हो गई इंतजार की

1 min
374

खत्म हो गई तमन्ना अब प्यार की

इन्तहा हो गई अब इंतजार की,

क्या खता हो गई है मुझसे सनम

क्या सितम कर दिया मैंने तुझपर सनम, 

जान लेगी मेरी बेरुखी यार की

इन्तहा हो गई अब इंतजार की।


वफ़ा हम ने की बेवफा तुम हुए

हम हमारे रहे ना तुम्हारे हुए,

तोड़ दी तुमने ही हर क़सम प्यार की 

इन्तहा हो गई अब इंतजार की।


चाँद जब भी निकलता है छत से मेरी

उसमें सूरत नजर आती है मुझको तेरी,

मैंने माना तुझे मूरत प्यार की 

इन्तहा हो गई अब इंतजार की।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance