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कवि धरम सिंह मालवीय

Romance

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कवि धरम सिंह मालवीय

Romance

इन्तहा हो गई इंतजार की

इन्तहा हो गई इंतजार की

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खत्म हो गई तमन्ना अब प्यार की

इन्तहा हो गई अब इंतजार की,

क्या खता हो गई है मुझसे सनम

क्या सितम कर दिया मैंने तुझपर सनम, 

जान लेगी मेरी बेरुखी यार की

इन्तहा हो गई अब इंतजार की।


वफ़ा हम ने की बेवफा तुम हुए

हम हमारे रहे ना तुम्हारे हुए,

तोड़ दी तुमने ही हर क़सम प्यार की 

इन्तहा हो गई अब इंतजार की।


चाँद जब भी निकलता है छत से मेरी

उसमें सूरत नजर आती है मुझको तेरी,

मैंने माना तुझे मूरत प्यार की 

इन्तहा हो गई अब इंतजार की।


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