STORYMIRROR

Satish Chandra Pandey

Inspirational

4  

Satish Chandra Pandey

Inspirational

इंसानियत को देख जिंदा

इंसानियत को देख जिंदा

1 min
244

गीत भँवरे ने गाया

मैं वहां चुप खड़ा था

उसकी लय में बहक कर

मन मेरा गुनगुनाया।


सुगंधित सी हवा

फूल ने जब बिखेरी,

नासिका में समाई

मन मेरा मुस्कुराया।


देख तिरछी नजर से

त्वरित दी प्रतिक्रिया

कुछ नहीं कह सका तब

मन मेरा गुदगुदाया।


पड़े असहाय की जब

मदद वो कर रहे थे,

नैन से देखकर यह

तन-बदन खिलखिलाया।


निरी इंसानियत को

देख कर आज जिन्दा

खुशी से भर गया मैं

तन-बदन खिलखिलाया।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational