STORYMIRROR

अनन्त आलोक

Abstract

4  

अनन्त आलोक

Abstract

हवा की दुकान

हवा की दुकान

1 min
318

मैं एक दुकान करूँगा

ताज़ी स्वच्छ शुद्ध हवा की दुकान

लोग आयेंगे,

बच्चे, बूढ़े, नौजवान

डाक्टर वकील मंत्री


इंजिनियर और बड़े से बड़े उद्योगपति

अपने अपने गले में

हवा का सिलेंडर लटकाए

भर भर ले जायेंगे

सांस लेंगे और जियेंगे


जब तक उनके सिलेंडर में हवा रहेगी

और जेब में पैसे

लोग किसी डाक्टर वकील या

इन्जिजियर के पास नहीं

मेरी दुकान के आगे खड़े होंगे

लम्बी कतार में


बड़े से बड़े मंदिर के आगे

लगने वाली कतार से भी लम्बी क़तर

मेरी दुकान में लगे होंगे कुछ

साधारण लेकिन अमूल्य वृक्ष

एक ओर से हवा आएगी


गन्दी कार्बनडाईओऑक्साइड युक्त हवा

वृक्ष उसे साफ़ करेंगे और मैं बेचता रहूँगा

अच्छा बिजनेस होगा

जब कहीं कोई पेड़ पौधा नहीं होगा।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract