STORYMIRROR

अनन्त आलोक

Others

3  

अनन्त आलोक

Others

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 min
188

उन की कोई भी इज्जत नहीं है

जिन के सर पर कोई छत नहीं है


बात क्या है समझ आए कैसे

तुम को सुनने की आदत नहीं है


हाँ लिखा है ये ख़त खून से पर

माशूका के लिए ख़त नहीं है


बंद कर के ये आँखें सुनो बस

ये वतन से मुहब्बत नहीं है


मांगते हो हुक़ूमत से इन्साफ़

तुम को इतनी लियाक़त नहीं है ?

मांगते इल्मो-तालीम सस्ती

दे दो इतनी भी ग़ुरबत नहीं है


होगा 'आलोक' मत यूँ लड़ो तुम

वक्त दरिया है परबत नहीं है।।



Rate this content
Log in