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Vikas Mishra

Drama

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Vikas Mishra

Drama

हर एक कलम के पीछे

हर एक कलम के पीछे

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हर एक कलम के पीछे

हर एक कविता के पीछे

है एक लिखने वाला

एक तन्हा लिखने वाला !


है एक सर्द रात का चाँद

कुछ अधूरे खाब

कुछ बिछड़े अरमान

एक हँसी चेहरा,

जो अपना न हो सका !


हैं कुछ नग़मे

कुछ आँसू

कुछ बातें कुछ यादें

कुछ बड़बोलेपन के वादे !


कुछ अन्तरंग ख्वाहिशें

फ़रमाइशें

उन साँसों की गरमाहट

नके रोम-रोम की वो आहट !


उन लबों की कम्पन्न

मेरी धड़कनों से मिलती

उनकी धड़कन,


हर एक उभरते शायर के पीछे,

है कोई अतृप्त वासना

अधूरी कोई कामना !


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