हर एक कलम के पीछे
हर एक कलम के पीछे
हर एक कलम के पीछे
हर एक कविता के पीछे
है एक लिखने वाला
एक तन्हा लिखने वाला !
है एक सर्द रात का चाँद
कुछ अधूरे खाब
कुछ बिछड़े अरमान
एक हँसी चेहरा,
जो अपना न हो सका !
हैं कुछ नग़मे
कुछ आँसू
कुछ बातें कुछ यादें
कुछ बड़बोलेपन के वादे !
कुछ अन्तरंग ख्वाहिशें
फ़रमाइशें
उन साँसों की गरमाहट
नके रोम-रोम की वो आहट !
उन लबों की कम्पन्न
मेरी धड़कनों से मिलती
उनकी धड़कन,
हर एक उभरते शायर के पीछे,
है कोई अतृप्त वासना
अधूरी कोई कामना !
