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बिमल तिवारी "आत्मबोध"

Inspirational

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बिमल तिवारी "आत्मबोध"

Inspirational

होलिका में दहन करो

होलिका में दहन करो

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सरसों के पीले फूलों से धरती अम्बर छाई हैं

नव बसंत रस प्रकृति लेकर फ़ाग महीना आई हैं

होली पूर्व हृदय प्रस्फुटित, बीते बरस का वमन करो

शोक विशाद व्यथित हृदय को होलिका में दहन करो


नए साल का नया महीना, लेकर आई मनहर होली

कर्कश तीखे स्वर को त्यागो, बोलो सबसे अमृत बोली

नई पर्व पर नई कसम ले, नए दायित्व का वहन करो

सारा ढोंग प्रपंच हृदय का, होलिका में दहन करो


खेलों कूदो मिलकर सारे, लेकर रँग गुलाल अबीर

मिटाकर भेदभाव को सारे, खींचो एकता की लकीर

कभी बिखरने तुम मत देना, इस बात को ग्रहण करो

ऊंच नीच सब छुआछूत को, होलिका में दहन करो


मानवता के रंगों से धरती अम्बर केसरिया हो

राग फ़ाग से आनंदित अपनी सारी दुनिया हो

हमसे कोई कष्ट नहीं हो, सबका झुक कर नमन करें

शान घमंड अभिमान को अपने, होलिका में दहन करें


सबको एक करने को आज केसरिया का पवन बहें

जीयें और जीने दे सबको, इस बात का जतन करें

मानवहित उठाने ख़ातिर, कुछ कष्टों का सहन करें

ईर्ष्या द्वेष नफ़रत हिंसा को, होलिका में दहन करें ।।


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