होली
होली
हर एक रंग प्यारे
तेरे जैसे ही लगते
आया है तू फागुन में
आई रंगों की होली
इंतज़ार बेहिसाब
तब मैंने पाया तुझे
छोड़ कर सबको
साजन, अब तेरी मैं होली
तरसती रहीं हर बात के लिए
अब हर बात प्यारी लगती
मधु घोले है कानों में
तेरी बातें है बातों की टोली
सुकून मिला तुझसे
गजब रंगत है छाई
होठों पे मुस्कान खिली
भरी खुशियों की झोंली
तुझे पाकर खिल उठी
और रंगी दुनिया सारी
झूम उठा मन मेरा
तुझे देखकर मै ऐसे डोली
सुनकर तुझे जगी
ऐसी ध्वनि हर तरफ
प्रीत की वीणा बजी
देखो कोयल भी बोली
