STORYMIRROR

D.N. Jha

Abstract

3  

D.N. Jha

Abstract

होली (कुंडलियां)

होली (कुंडलियां)

1 min
202

होली आयी द्वार पर, मोहन खेले रंग।

शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा,राधा रानी संग।।

राधा रानी संग, कृष्ण मारें पिचकारी।

निकले ऐसे रंग,भीगती दुनिया सारी।।

ऐसा चढ़े उमंग,गीत गाती हमजोली।

मस्ती की है बात,पर्व जब आती होली।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract