STORYMIRROR

Devendra Kumar Sharma

Abstract

3  

Devendra Kumar Sharma

Abstract

होली का त्यौहार

होली का त्यौहार

1 min
176

प्रेम के रंगों से सब रंग लें मन को जो एक बार।

समझो सार्थक हो जायेगा होली का त्यौहार।।

लगते रिश्ते नाते झूठे

यूं ही प्रेम के बन्धन टूटे।

तनिक भी प्रेम रहा नहीं मन में

ईर्ष्या अग्नि लगी है तन में।।

ईर्ष्या की अग्नि पर कर लो प्रेम रंग फुहार ।

समझो सार्थक हो जायेगा होली का त्यौहार।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract