STORYMIRROR

Rekha Verma

Abstract

3  

Rekha Verma

Abstract

होली आई रे

होली आई रे

1 min
254

होली आई होली आई

 रंगों से भरी झोली लाई

लाल गुलाबी नीले पीले

 तरह-तरह के रंंग है खिलाई

देखो रंगीनियों जमाती आई

होली आई होली आई

अंबर देखो हो गया लाल

धरती पर भी छाया धमाल

भैया ने पकड़ी कलाई

भाभी लाज से बड़ा शरमाई

और घुट रही यह ठंडाई


मम्मी भी मावे की गुजिया लाई

सबको प्यार से बड़ा खिलाई

होली खेलो पिया हरजाई

नहीं तो देखो होगी रुसवाई

यही बात समझाने आई 

मुख ना फेरो मस्ती छाई

होली आई होली आई

क्या बच्चे क्या बूढ़े जवान

रंगों से रंगे है चेहरे बेहाल

कर रहे हैं मस्ती ठोक कर ताल

चली है देखो फागुनी बयार

सब और खुशियां बरसाती आई

होली आई होली आई

रंगों से भरी झोली लाई

रेखा वर्मा 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract