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Nand Kumar

Abstract

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Nand Kumar

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हंसी ख्वाब

हंसी ख्वाब

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देखा था एक ख्वाब हमारा, 

भी अपना होगा कोई।

साथ निभाकर प्यार जताकर, 

देगा फिर खुशियां खोई।।


इस तृष्णा मे इधर उधर के, 

चक्कर बहुत लगाए।

मिला न सच्चा मीत थके हम, 

कर मल मल पछताए।।


सदा तरसते कान हमारे, 

सुनने को मृदु बयन किसी के।

बने चकोरी नयन है व्याकुल, 

कब दर्शन हो चन्द्र मुखी के।।


ह्रदय धड़कता प्यार उमडता, 

चाहत लेती है अंगड़ाई।

ख्वाब मे बसने बाली मेरे, 

सोचू कब दे दिखाई।।


मुझ अधीर को आकर के,

अब तुम ही धीर बंधाओ।

देकर परश सुहावन शीतल, 

मन की प्यास बुझाओ।।


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