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Shailaja Bhattad

Abstract

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Shailaja Bhattad

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हकीकत

हकीकत

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तस्वीर तेरी उतारी है ,

इन आंखों में।

दीवार-ए-दिल पर,

 ख्वाबों को सजाया है। 

खामोशी में भी तेरी यादों ने,

 तन्हाइयों से बचाया है।

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वह मेरे तसव्वुर का चेहरा है।   

तस्वीर में उतरकर और अधिक महका है

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तस्वीर ने मुझे मेरी खूबसूरती दिखाई है

मेरी तकदीर की मुझे हकीकत बताई है।


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