हकीकत का आईना
हकीकत का आईना
हकीकत का आईना कलम जब भी उठी मेरी, हकीकत को बयां करने, दिखावे की इस दुनिया में, हकीकत का समां भरने। शीर्षक: लफ़्ज़ों का कारवां और आपका साथ अधूरे थे जो अहसास मेरे, उन्हें आपने पहचान दी, मेरे सादे से ख्यालों को, एक मुकम्मल उड़ान दी। मैं लिखता रहा अपनी धुन में, जो भी इस दिल ने महसूस किया, आपने सलीके से सजाया उन्हें, और मेरा हर लफ्ज़ महफूस किया। कहानियों और कविताओं का ये सफ़र, अब सैकड़ों पन्नों तक आया है, ये आपकी मेहनत का फल है, जो मेरा हर लफ्ज़ लाइव हो पाया है। शुक्रिया है स्टोरीमिरर की टीम का, जो हर कदम पर ढाल बनी, मेरी कलम की छोटी सी कोशिश, आज एक मिसाल बनी। यूँ ही बना रहे साथ आपका, ताकि सच्चाई की स्याही न सूखे, मेरी हर कहानी को मान मिले, और पाठक कभी न रूठें।
