शीर्षक: जादुई साया
शीर्षक: जादुई साया
सिर पर त्रिकोणीय लंबी टोपी, आँखों में तारों की चमक, हाथ में पकड़ी जादुई छड़ी, फैलाती खुशबुओं की महक। ये डरावनी रातों की चुड़ैल नहीं, ये भोर की पहली लाली है, इसकी हर एक जादुई फूंक में, छिपी एक नई खुशहाली है। अंबर से ये बातें करती, बादलों पर ये सोती है, रात के गहरे सन्नाटों में, ये जादू के बीज बोती है। काले लिबास के पीछे इसके, कोमल सा एक मन है, जिसकी जादुई शक्ति का, सारा जग ही कायल है। पुराने पेड़ों की शाखों पर, ये अपनी महफ़िल सजाती है, रूठे हुए परिंदों को, ये मीठी लोरी सुनाती है। इसे डर नहीं अंधेरों का, ये खुद में एक सवेरा है, जहाँ भी ये कदम रखे, वहाँ खुशियों का बसेरा है। शब्दों का जाल बुनती है, ये जादू का खेल दिखाती है, हर एक टूटे हुए दिल को, ये जीना फिर सिखाती है। ये नन्हीं सी परछाईं, ज़माने के लिए एक राज़ है, इसकी खामोश हंसी में ही, छिपा कुदरत का साज़ है।
