बंदर का टशन
बंदर का टशन
शीर्षक: बंदर मामा का टशन लाल गुलाबी मुँह है इनका, पूँछ बड़ी कड़ोर, गली-गली में मचा रहे हैं, ये तो भारी शोर। पहन के कुर्ता, हाथ में छाता, निकले ठाठ से बाहर, समझ रहे हैं खुद को जैसे, पूरे शहर के मेयर। हलवाई की भट्टी से ये, गरमा-गरम समोसा उड़ाए, मिर्ची लगी जो तीखी वाली, छत पर चढ़ के पूँछ हिलाए। खंभे ऊपर बैठ के देखो, करते चश्मे का व्यापार, छीन के सबका चश्मा बोले— "मैं हूँ सबसे बड़ा होशियार!" धोबी जी की धुली हुई, कमीज़ पहन कर भागे, पीछे-पीछे पूरी बस्ती, बंदर मामा आगे। आईना देखा जो रस्ते में, अपनी ही सूरत से डर गए, लगा कि पीछे शेर पड़ा है, गिरते-पड़ते घर गए। दाँत दिखा के डरा रहे हैं, हाथ में पकड़ा आधा केला, इनकी एक ही उछल-कूद में, लग जाता है भारी मेला। नटखट हैं और चंचल भी हैं, सबकी नाक में दम है करते, पर बच्चों की टोली देखे, तो ये भी हैं थोड़ा डरते। एक छोटा सा जोक (मजाक): बंदर का बच्चा: माँ, हम इंसान की तरह क्यों नहीं दिखते? माँ बंदर: बेटा, अभी तो हम सुखी हैं, उनकी तरह दिखने लगे तो फालतू की टेंशन लेकर बैठना पड़ेगा!
