जल-वृक्ष नाता
जल-वृक्ष नाता
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शीर्षक: प्यासे पेड़, बरसता पानी बरखा रानी जब भी आती, खुशियाँ संग लाती है, तपती धरती, प्यासे पेड़ों की, प्यास बुझाती है। शाखों पर पड़तीं जब बूँदें, वो झूम-झूम गाते हैं, जैसे बिछड़े साथी कोई, बरसों बाद मिल पाते हैं। जड़ों तक जब पानी पहुँचता, रूह हरी हो जाती है, हर एक पत्ती, हर एक कली, फिर से मुस्कुराती है। पेड़ और पानी का ये रिश्ता, जनम-जनम का नाता है, बिन पानी के पेड़ अधूरे, बिन पेड़ों के जल न आता है। छोटे टैग्स (Tags) #बरसात
