STORYMIRROR

sukhwinder Singh

Children Stories

4  

sukhwinder Singh

Children Stories

जल-वृक्ष नाता

जल-वृक्ष नाता

1 min
2

शीर्षक: प्यासे पेड़, बरसता पानी ​बरखा रानी जब भी आती, खुशियाँ संग लाती है, तपती धरती, प्यासे पेड़ों की, प्यास बुझाती है। शाखों पर पड़तीं जब बूँदें, वो झूम-झूम गाते हैं, जैसे बिछड़े साथी कोई, बरसों बाद मिल पाते हैं। ​जड़ों तक जब पानी पहुँचता, रूह हरी हो जाती है, हर एक पत्ती, हर एक कली, फिर से मुस्कुराती है। पेड़ और पानी का ये रिश्ता, जनम-जनम का नाता है, बिन पानी के पेड़ अधूरे, बिन पेड़ों के जल न आता है। ​छोटे टैग्स (Tags) ​#बरसात


Rate this content
Log in