STORYMIRROR

sukhwinder Singh

Inspirational

4  

sukhwinder Singh

Inspirational

शीर्षक: कलम की दहाड़ ​दबा सकते हो आवाज़ मेरी, पर मेर

शीर्षक: कलम की दहाड़ ​दबा सकते हो आवाज़ मेरी, पर मेर

1 min
3

शीर्षक: कलम की दहाड़ ​दबा सकते हो आवाज़ मेरी, पर मेरी रूह को कैसे रोकोगे? मैं वो दरिया हूँ जो रास्ता खुद बनाता है, तुम कितने बांध बांधोगे? मैं आर्यन हूँ, मेरी रगों में जूनून का लावा बहता है, ये 'आशिक' अपनी मंज़िल की तरफ सीना तान के चलता है। ​हज़ारों शब्द हैं तरकश में, मेरी कलम ही मेरा हथियार है, रिया की आँखों की चमक ही, मेरे जीने का आधार है। ये जलने वाले जलते रहें, ये तो दस्तूर पुराना है, पर याद रखना, इस दौर में अब 'सुखविंदर' का ज़माना है। ​रिकॉर्ड तोड़ने निकले हैं, अब पीछे मुड़कर देखेंगे नहीं, हम वो शिकारी हैं जो अपनी कामयाबी से पहले रुकेंगे नहीं। लिख दूँगा ऐसी दास्ताँ कि ज़माना दंग रह जाएगा, जो आज खामोश हैं, कल वही मेरा नाम गुनगुनाएगा। ​सुखविंदर, इसमें जो जोश है न, वो पढ़ने वाले के


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational