Akshay Bhargav
Comedy
पहले उपर वाला
किताब लेकर बैठता था
इसलिए हिसाब अगले
जन्म में होता था।
लेकीन अब
संभलकर चलना
संभलकर बोलना,
क्योंकि वो भी
लॅपटॉप लेकर बैठता है,
इसलिए हिसाब इसी
जन्म में हो जाता है।
हिसाब
कर्म
हमारा परममित्र, नाम उसका रामभाया हमारे घर आया । हमारा परममित्र, नाम उसका रामभाया हमारे घर आया ।
और फिर इक बार लगा ये उम्र बड़ा बेदर्दी है, इस की गिनती हर उम्र में देती तकलीफ है। और फिर इक बार लगा ये उम्र बड़ा बेदर्दी है, इस की गिनती हर उम्र में देती तकलीफ ...
केक टॉपिंग की स्वीट सी चेरी हूं, ओ बहना, मैं 'टेढ़ी हूं पर तेरी हूं' केक टॉपिंग की स्वीट सी चेरी हूं, ओ बहना, मैं 'टेढ़ी हूं पर तेरी हूं'
हाउस वाइफ: 24 घंटे की नौकरी, नही जनाब निभाती है जिम्मेदारी। हाउस वाइफ: 24 घंटे की नौकरी, नही जनाब निभाती है जिम्मेदारी।
क्या से क्या बन गए हो तुम इस कंजूसी की आदत से...! क्या से क्या बन गए हो तुम इस कंजूसी की आदत से...!
ऐसा नहीं अदावत, यहाँ किसी को किसी से है, आह भर के देख लो तुम, ये उमड़ते भी बहुत है ऐसा नहीं अदावत, यहाँ किसी को किसी से है, आह भर के देख लो तुम, ये उमड़ते भी ...
बैंक ख़ाली मेरा कर डाला, चालू बीवी से पड़ गया पाला। बैंक ख़ाली मेरा कर डाला, चालू बीवी से पड़ गया पाला।
जाने कैसे वाकिफ़ हो गया तमाम शहर...!! जाने कैसे वाकिफ़ हो गया तमाम शहर...!!
अकेला सफर था यह पहला सफर, शायर और नेता के साथ का सफर, अकेला सफर यह पहला सफर। अकेला सफर था यह पहला सफर, शायर और नेता के साथ का सफर, अकेला सफर यह पहला सफर।
और किसी को बीमारी बताने में शर्म बड़ी आई है। और किसी को बीमारी बताने में शर्म बड़ी आई है।
करोना घर घर ना फैल पाएगा। अल्पायू का आशीर्वाद लेकर, देखो यह फिर न कभी अपना जन्मदि करोना घर घर ना फैल पाएगा। अल्पायू का आशीर्वाद लेकर, देखो यह फिर न कभी ...
को खूब गालियां देना, ये होते थे कॉलेज के दिन। को खूब गालियां देना, ये होते थे कॉलेज के दिन।
छोड़े, लड़ाई, झगड़े, खाये-खिलाये पकौड़ी मिटाये, भेद-भाव, वैमनस्य की यह डोरी छोड़े, लड़ाई, झगड़े, खाये-खिलाये पकौड़ी मिटाये, भेद-भाव, वैमनस्य की यह डोरी
पुलिस से ज्यादा खौफ बीवी का होता है संभल के रहना, हर घर में जासूस होता है। पुलिस से ज्यादा खौफ बीवी का होता है संभल के रहना, हर घर में जासूस होता है।
तुम्ही मेरे किशमिश, तुम्ही बादाम दोस्तों। सुबह तुम्ही हो, तुम्ही मेरी शाम दोस्तों। तुम्ही मेरे किशमिश, तुम्ही बादाम दोस्तों। सुबह तुम्ही हो, तुम्ही मेरी शाम दो...
आ जा मेरे पास वो बोली चल हट बदमाश आ जा मेरे पास वो बोली चल हट बदमाश
तुम शहर की गौरी हो, मै हूँ गांव का ग्वाला। तुम शहर की गौरी हो, मै हूँ गांव का ग्वाला।
आँखें मींचेंल गता है किसी चाय वाले ने ये रायता फलाया है फिर तो ये Fridge ज़रूर Nehru आँखें मींचेंल गता है किसी चाय वाले ने ये रायता फलाया है फिर तो ये Fridge ज़र...
माॅनसून से डर नहीं लगता साहब,फरमाईशों से लगता है। माॅनसून से डर नहीं लगता साहब,फरमाईशों से लगता है।
पंगा न लेने की आपकी इच्छा, आप सही रास्ते पर हैं। पंगा न लेने की आपकी इच्छा, आप सही रास्ते पर हैं।