Akshay Bhargav
Comedy
पहले उपर वाला
किताब लेकर बैठता था
इसलिए हिसाब अगले
जन्म में होता था।
लेकीन अब
संभलकर चलना
संभलकर बोलना,
क्योंकि वो भी
लॅपटॉप लेकर बैठता है,
इसलिए हिसाब इसी
जन्म में हो जाता है।
हिसाब
कर्म
वर्षा का स्वागत-- गीत अब के बरस भी ना उठ पाऐगी...... बिटिया की डोली ।कर्ज़ पाटने में गुज़रेगी ; ईद---... वर्षा का स्वागत-- गीत अब के बरस भी ना उठ पाऐगी...... बिटिया की डोली ।कर्ज़ पाटने...
हर दिन हमारी आँखों के सामने, हमारे आसपास इंसानियत का कत्ल होता है और हम कुछ करना तो दूर कुछ कहते भी ... हर दिन हमारी आँखों के सामने, हमारे आसपास इंसानियत का कत्ल होता है और हम कुछ करना...
बच्चों की खुशी के लिए सब कुछ करते है पर बच्चों की खुशी किसमें है यही पुछना हमेशा बच्चों की खुशी के लिए सब कुछ करते है पर बच्चों की खुशी किसमें है यही पु...
चुटकियों में मिल जो रहा है, तभी तो वो मुझे अपना गुरु मानने लगा है। चुटकियों में मिल जो रहा है, तभी तो वो मुझे अपना गुरु मानने लगा है।
आखिरकार मैंने, कुछ शब्दो को धरदबोचा, और छंदों की गांठ मारी और किस्सों को पोटली में खोसा. मैंने इन स... आखिरकार मैंने, कुछ शब्दो को धरदबोचा, और छंदों की गांठ मारी और किस्सों को पोटली ...
अपने सभी परिजन को देख ले आखरी बार यामलोक तू जाने को अब हो जा तैयार अपने सभी परिजन को देख ले आखरी बार यामलोक तू जाने को अब हो जा तैयार
तुम जिसे अपनी सफलता कहते हो और जिसका बखान करते थकते नहीं हो दरअसल वह तुम्हारा बेरंग और निष्ठुर होना ... तुम जिसे अपनी सफलता कहते हो और जिसका बखान करते थकते नहीं हो दरअसल वह तुम्हारा बे...
ऊपर से जाने कहांँ से मिल गया उसे वरदान में सुपर पावर। ऊपर से जाने कहांँ से मिल गया उसे वरदान में सुपर पावर।
शर्मा जी की घरवाली को एक दिन मिला बड़ा खज़ाना, बोले शर्मा जी क्या है यह माजरा ज़रा हमे शर्मा जी की घरवाली को एक दिन मिला बड़ा खज़ाना, बोले शर्मा जी क्या है यह माजरा...
एक भाई का अपनी बहन से निवेदन की वो उसे इस बार राखी न बांधे. क्योंकि वो अपने भाई होने का फर्ज ठीक से ... एक भाई का अपनी बहन से निवेदन की वो उसे इस बार राखी न बांधे. क्योंकि वो अपने भाई ...
हिन्दू मुस्लिम की खाई को देना है पाट, अरे कभी खा के तो देखो मजेदार पापड़ी चाट। हिन्दू मुस्लिम की खाई को देना है पाट, अरे कभी खा के तो देखो मजेदार पापड़ी चाट।
वरना सुनना पड़े, वो मंजवाती है बरतन, आप पैर दबवाओगे। वरना सुनना पड़े, वो मंजवाती है बरतन, आप पैर दबवाओगे।
बहुत दिनों से मैं सोच रहा था कि काश! मैं भी भगवान होता। बहुत दिनों से मैं सोच रहा था कि काश! मैं भी भगवान होता।
हाइकु और दोहा, राह में टकरा गए, एक दूजे को घूरा। हाइकु और दोहा, राह में टकरा गए, एक दूजे को घूरा।
प्यार से समझाने की बहुत कोशिश की रह-रहकर, मगर सब बेकार, बस बैठी थी वह एक ही रट लगाकर प्यार से समझाने की बहुत कोशिश की रह-रहकर, मगर सब बेकार, बस बैठी थी वह एक ही र...
कविता मानव मन के समसामयिक द्वंदों पर आधारित है जिसमें कवि अपने अंतर्मन के भावनाओं और संलापों को अपने... कविता मानव मन के समसामयिक द्वंदों पर आधारित है जिसमें कवि अपने अंतर्मन के भावनाओ...
दूसरों के पैरों की ठोकर खाने के लिए वहीं पड़ा रहने दिया दूसरों के पैरों की ठोकर खाने के लिए वहीं पड़ा रहने दिया
जानूँ ! सारी !! मुझे देर हो गई !’ प्रीति पर्व की लो ढेरों बधाई !! जानूँ ! सारी !! मुझे देर हो गई !’ प्रीति पर्व की लो ढेरों बधाई !!
सालियों द्वारा जूते चुराने के भरपूर प्रयास किए जा रहे थे, सालियों द्वारा जूते चुराने के भरपूर प्रयास किए जा रहे थे,
बैठे बैठे कहते है हर घर की के जीजा, अब कभी न मँगवाना बाहर से पिज्जा। बैठे बैठे कहते है हर घर की के जीजा, अब कभी न मँगवाना बाहर से पिज्जा।