Akshay Bhargav
Comedy
पहले उपर वाला
किताब लेकर बैठता था
इसलिए हिसाब अगले
जन्म में होता था।
लेकीन अब
संभलकर चलना
संभलकर बोलना,
क्योंकि वो भी
लॅपटॉप लेकर बैठता है,
इसलिए हिसाब इसी
जन्म में हो जाता है।
हिसाब
कर्म
इसी नेक इरादे से हम आ गए छत पर, एक हाथ में चरखी और दूसरे में पतंग लेकर। इसी नेक इरादे से हम आ गए छत पर, एक हाथ में चरखी और दूसरे में पतंग लेक...
अनार की दास्तान....बाजार में अनार न सिर्फ महंगा मिला बल्कि उसमें से कुछ सड़े भी मिले अनार की दास्तान....बाजार में अनार न सिर्फ महंगा मिला बल्कि उसमें से कुछ सड़े भी म...
Inventions are done to make life simpler, but today we are so depended on these inventions that it b... Inventions are done to make life simpler, but today we are so depended on these ...
अब समझने लगा हूं, जाता हूं वहाँ जहाँ प्रेम से बुलाते जीमने। अब समझने लगा हूं, जाता हूं वहाँ जहाँ प्रेम से बुलाते जीमने।
दे दो जेब का खर्च, कह्यौ हँसकर घरवाली। दे दो जेब का खर्च, कह्यौ हँसकर घरवाली।
कैसा स्टेटस ये स्टाइल का हाय स्यापा ! मोबाइल का। कैसा स्टेटस ये स्टाइल का हाय स्यापा ! मोबाइल का।
पार क्यों करना सीमाओं को, जलती यहाँ की छाँव। पार क्यों करना सीमाओं को, जलती यहाँ की छाँव।
जी करे ढिंढोरा पीटूँ, फिर हो गयी सैटिंग मेरी जी करे ढिंढोरा पीटूँ, फिर हो गयी सैटिंग मेरी
शर्मा जी ने सबक ये सीखा, करो समझ बूझ कर भला किसी का। शर्मा जी ने सबक ये सीखा, करो समझ बूझ कर भला किसी का।
मैं कुंदन हूं काशी का तुम गंगा का "घाट" प्रिये तुमसे इश्क़ करके मेरी लग गई लंबी "वाट" प्रिये मैं कुंदन हूं काशी का तुम गंगा का "घाट" प्रिये तुमसे इश्क़ करके मेरी लग गई लं...
पापा जी को पसंद एक स्कूटर व दूसरा चाय का प्याला। पापा जी को पसंद एक स्कूटर व दूसरा चाय का प्याला।
टॅड़ी जो देखन मैं चला टॅड़ी न मिलीया कोई आईना जो देख लिया खूद सा टॅड़ी न कोई हनी हनी सभौं ... टॅड़ी जो देखन मैं चला टॅड़ी न मिलीया कोई आईना जो देख लिया खूद सा टॅड़ी न क...
खोल दियो सब राज विहंसि कर पत्नी बोली। खोल दियो सब राज विहंसि कर पत्नी बोली।
चाहे जितना भी डालेंगे, फिर कभी वह रोशन हो ना पायेंगे। चाहे जितना भी डालेंगे, फिर कभी वह रोशन हो ना पायेंगे।
महंगाई की मार आम आदमी के सामने इतनी मुश्किलें खडी होती है की वह बिमार पडा तो भी डाक्टर के पास जाने स... महंगाई की मार आम आदमी के सामने इतनी मुश्किलें खडी होती है की वह बिमार पडा तो भी ...
दो चार साल और देखे तो फ्यूचर बनेगा ढोल। दो चार साल और देखे तो फ्यूचर बनेगा ढोल।
काव्य संग्रह को तुम टाइप करके पी डी एफ मुझ को भेज सकते हो। काव्य संग्रह को तुम टाइप करके पी डी एफ मुझ को भेज सकते हो।
बेचारी जनता कैसे जिये, सोच रही है इन सुराखों को कैसे सिये। बेचारी जनता कैसे जिये, सोच रही है इन सुराखों को कैसे सिये।
बिना बुलाये आ जाती है अपने पर शामत। बिना बुलाये आ जाती है अपने पर शामत।
आइ लव यूँ कहा आइ लव यूँ कहा