हिंदुस्तान
हिंदुस्तान
काश इस तरह हमारी पहिचान होने लगे
शंख बजने लगे साथ ही अजान होने लगे
हिन्दू - मुसलमान होते है तो हो जाये वो
लेकिन दिल से सभी लोग इंसान होने लगे
एकता अखण्डता के सूत्र में हम यूँ
बंधे कि एक आरे में गीत व कुरान होने लगे
न कहनी पड़े गुलजार को आजदी गलत
हिंदुस्तानी रहे, न हिन्दू मुसलमान होने लगे
मजहब हो देश मे वो भी जरूरी है
ऋषभ पर मजहब से पहले हिंदुस्तान होने लगे।
