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Shashi Aswal

Abstract


3.0  

Shashi Aswal

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हिंदी पर गर्व

हिंदी पर गर्व

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जब हिंदी है देश की आन

तो क्यूँ नहीं देश की शान 


जब भारतीय होना है अभिमान 

तो हिंदी बोलने में क्यूँ नहीं मान 


जब दिल-खोलकर यहाँ का खाना है खाते 

तो क्यूँ नहीं हिंदी भाषा को दिल से अपनाते 


जब यहाँ के त्यौहार में घुल-मिल है जाते 

तो क्यूँ नहीं हिंदी को बोली में है शामिल करते 


जब हर साल है बनाते इसका पर्व 

तो क्यूँ नहीं करते हिंदी पर गर्व।


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