हिंदी पर बिंदी हिंदी दिवस
हिंदी पर बिंदी हिंदी दिवस
हिंदी दिवस
आज दिवस है हिंदी का,
राष्ट्रभाषा है हमारी हिंदी का।
मुझे बहुत प्यारी लगती है,
यह भाषा सीधी, सादी और अनोखी है।
हर दिल को भाती है,
अपनी बात को सरलता से कह जाती है।
सीधी सरल भाषा हमारी,
हर शब्द में मिठास है भारी।
हर भाषा से न्यारी है हिंदी,
कहावतों में गहराई है,
थोड़े शब्दों में गहरा अर्थ समाई है।
एक-एक कहावत,
दस-दस पर भारी है।
सीधी, सरल, समझने में सुलभ,
हमारी यह भाषा बहुत है सरल।
इसके ऊपर जब बिंदी आती है,
पूरा अर्थ ही बदल जाता है।
बिना बिंदी के ‘हिंदी’ भी ‘हिदी’ हो जाती है।
यह अनोखी भाषा हमारी,
हर चिन्ह से नया अर्थ बताती है।
कहीं पूर्णविराम, कहीं अनुस्वार,
कहीं बिंदी में छिपा प्यार।
इन सब में खो जाती है मेरी प्यारी हिंदी।
गहरी साहित्यिक भाषा,
आज तक समझ में नहीं आई।
हमने सरल हिंदी को अपनाया,
और खुश हैं कि इसे आपने भी अपनाया।
हमारी हिंदी,
बोलने और समझने में सबसे प्यारी।
साहित्यिक भाषा अब भी कठिन लगती है,
लेकिन सरल हिंदी से हमें अपनापन मिलता है।
आज हिंदी के साथ अंग्रेज़ी का चलन बढ़ गया है,
अब इंग्लिश भी हिंग्लिश बन गई है।
हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ,
क्यों न हम हर दिन हिंदी दिवस मनाएँ।
घर में हिंदी बोलने का चलन लाएँ,
ताकि राष्ट्रभाषा हमारे जीवन में स्थान पाए।
नयी पीढ़ी अंग्रेज़ी में गिटपिट करती है,
हिंदी बोलने में उन्हें जोर आता है।
पर कोर्स में पढ़नी तो पड़ती है,
तब उन्हें नानी की याद आती है।
कहते हैं, "हाय, कितनी कठिन है यह हिंदी!"
नानी बोली, "दिल से अपना लो,
यह भाषा सरल और प्यारी है।"
ऐसी प्यारी भाषा हमारी है हिंदी,
जिसके माथे पर है बिंदी।
