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हिंदी बीर रस कविता – दगाबाज बा

हिंदी बीर रस कविता – दगाबाज बा

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घात लगाके करते आघात दगाबाज बाज तो आओ ।

बिना बात देते गोला दाग दगाबाज बाज तो आओ ।

तू हमारी सराफत कमजोरी समझ भूल कर जाता ।

करे वार बेवजह बेआवाज दगाबाज बाज तो आओ ।

अपनी बरबादियो का होता तुझे कभी एहसास नही ।

दिए है तुझे कई घाव अब दगाबाज बाज तो आओ ।

दिया करारी चोट कारगिल हार क्यों भल गया तू ।

दिया सर्जिकल स्ट्राइक दाग दगाबाज बाज तो आओ ।

जब देखो काश्मीर राग तुम अलापते गाते हरदम ।

छेड़ोगे पछाडेंगे धोबिया दाँव दगाबाज बाज तो आओ ।

गिन गिन तेरे शागिर्दों घाटी कश्मीर साफ़ किया हमने ।

चाहता तू हो पाक पूरा साफ दगाबाज बाज तो आओ ।

है हिन्दुस्तान की सेना लौकी बतिया नहीं मर जाएगी ।

कर देंगे सुपड़ा तेरा साफ़ दगाबाज बाज तो आओ ।

बिगाड़ा क्या तेरा निर्दोसो निहत्थो लासे बिछाते हो तुम ।

करेगा भारत ना तुझको माफ़ दगाबाज बाज तो आओ ।

शेरे हिन्द जवान जिगर फौलादी हुनर बाज रखते है ।

 एयर स्ट्राइक किया बर्बाद दगाबाज बाज तो आओ ।


 




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