हे प्रभु
हे प्रभु
हे प्रभु
मुझ पर अपनी कृपा
बनाये रखना
जब तब मैं
सोना उगलती रहूं
मुझे मिट्टी न बनाना
जिस उद्देश्य को पूरा करने
तुमने भेजा मुझे इस धरती पर
उसे सार्थक करने में मेरी
मदद करना
अपना हाथ सदैव
मेरे सिर पर रखना
मुझ पर अपने आशीर्वाद की
बौछार करना
धूप से बनकर
मेरे जीवन में हमेशा
ज्ञान की रोशनी भरना
अज्ञानता के अंधेरे में
मुझे कभी न धकेलना
जब तुम्हें लगे कि
मेरे जीवन का उद्देश्य
भली भांति पूर्ण हुआ
दूसरों की सेवा में तन मन धन से अर्पित हुआ
सोने का खजाना अब खाली हुआ तो
अपने चरणों में मुझे स्थान देना
अपनी सेवा के लिए फिर
मुझे हमेशा के लिए
अपने पास बुला लेना
मेरे प्रभु।
