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Rajit ram Ranjan

Abstract

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Rajit ram Ranjan

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हौसलों कि खिड़कियां !

हौसलों कि खिड़कियां !

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नक़ाब में छिपाकर

सब हुनर घूमते हैं 

हैं धोखे का इरादा,

प्यार से हथेली चूमते हैं


हैं दर्द दिल में गहरा, 

पर किसको हम बताये 

हैं जख़्म इस दिल पर, 

छुपता नहीं छुपाये 


हर आस टूट जाती, 

उम्मीद छूट जाती 

हौसलों कि खिड़कियां, 

भला कौन खोल पाए 

हैं कत्ल कि तमन्ना, 

लोग ज़हर लेकर घूमते हैं 


हैं धोखे का इरादा,

प्यार से हथेली चूमते हैं

नक़ाब में छिपाकर

सब हुनर घूमते हैं !


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