STORYMIRROR

असअद भोपाली

Tragedy

2  

असअद भोपाली

Tragedy

ग़म-ए-हयात से जब वास्ता पड़ा

ग़म-ए-हयात से जब वास्ता पड़ा

1 min
347


ग़म-ए-हयात से जब वास्ता पड़ा होगा

मुझे भी आप ने दिल से भुला दिया होगा


सुना है आज वो ग़म-गीन थे मलूल से थे

कोई ख़राब-ए-वफ़ा याद आ गया होगा


नवाज़िशें हों बहुत एहतियात से वरना

मेरी तबाही से तुम पर भी तबसरा होगा


किसी का आज सहारा लिया तो है दिल ने

मगर वो दर्द बहुत सब्र-आज़मा होगा


जुदाई इश्क़ की तक़दीर ही सही ग़म-ख़्वार

मगर न जाने वहाँ उन का हाल क्या होगा


बस आ भी जाओ बदल दें हयात की तक़दीर

हमारे साथ ज़माने का फ़ैसला होगा


ख़याल-ए-क़ुर्बत-ए-महबूब छोड़ दामन छोड़

के मेरा फ़र्ज़ मेरी राह देखता होगा


बस एक नारा-ए-रिंदाना एक ज़ुरा-ए-तल्ख़

फिर उस के बाद जो आलम भी हो नया होगा


मुझी से शिकवा-ए-गुस्ताख़ी-ए-नज़र क्यूँ है

तुम्हें तो सारा ज़माना ही देखता होगा


'असद' को तुम नहीं पहचानते तअज्जुब है

उसे तो शहर का हर शख़्स जानता होगा


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy