STORYMIRROR

Chandresh Kumar Chhatlani

Abstract

3  

Chandresh Kumar Chhatlani

Abstract

ग्लेशियर हैं रिश्ते

ग्लेशियर हैं रिश्ते

1 min
130

किसी ग्लेशियर की तरह रिश्ते,

गर्मी से पिघल जाते हैं,

बन जाते हैं पानी।


फर्क इतना सा है कि,

रिश्तों में,

दुनिया देखती है पानी, जानती है पानी,

लेकिन, कहती है ग्लेशियर।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract