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Shahnaz Rahmat

Inspirational

4.8  

Shahnaz Rahmat

Inspirational

गीत - नया समाज

गीत - नया समाज

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863


है नये समाज की कल्पना निगाह में

डूबे ना जहां कोई आँसुओं में आह में


स्त्रियों को सब यहां दीन हीन मानते

ज़ुल्म ढाते करते हैं बन्द सारे रास्ते

उम्र सारी बीतती है मर्द की पनाह में

है नये समाज की कल्पना निगाह में

डूबे ना जहां कोई आँसुओं में आह में


मान सम्मान और असलियत को भूलकर

ये रहें समर्पिता अहमियत को भूलकर

सहती हैं कठोरता अपनेपन की चाह में

है नये समाज की कल्पना निगाह में

डूबे ना जहां कोई आँसुओं में आह में


भेदभाव दूर हो, अत्याचार दूर हो

नारियों के प्रति सारे कुविचार दूर हो

सारे मानव एक हैं न्याय की निगाह में

है नये समाज की कल्पना निगाह में

डूबे ना जहां कोई आँसुओं में आह में


रुढ़ियों, कुरीतियों आडम्बरों को त्याग कर

मिथ्याचार, अहंकार, क्रूरता को त्याग कर

मिल के हम बढ़े चलें उन्नति की राह में

है नये समाज की कल्पना निगाह में

डूबे ना जहां कोई आँसुओं में आह में



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