गीत- किताब
गीत- किताब
साथ छोड़ जायें जब अपने,
साथी बने किताब तब।
आँसू दे जायें जब सपने,
साथी बने किताब तब॥
भूल किताबों को बढ़ पाया,
ऐसा कौन महान है।
जिसने विद्या को बिसराया,
बहुत बड़ा नादान है।
जब दिमाग लग जाये खपने,
साथी बने किताब तब।
आँसू दे जायें जब सपने,
साथी बने किताब तब॥
जहाँ किताबें नहीं पढ़ें सब,
रुकता वहीं विकास है।
मिटती वहाँ सनातन संस्कृति,
हो जाता सब नाश है।
जब जब लगे बुराई तपने,
साथी बने किताब तब।
आँसू दे जायें जब सपने,
साथी बने किताब तब॥
आदि काल से हिंद सुशोभित,
गीता वेद पुराण से।
सदा किताबों के दम से ही,
ज्ञान लड़ा अज्ञान से॥
साक्षरता लग जाये ढपने,
साथी बने किताब तब।
आँसू दे जायें जब सपने,
साथी बने किताब तब॥
