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Shyam Kunvar Bharti

Romance


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Shyam Kunvar Bharti

Romance


गीत – इश्क ए सैलाब

गीत – इश्क ए सैलाब

1 min 170 1 min 170

उफनते हुस्न ए सैलाब मुझे बहा न देना तुम।

शराबी नजरों शबाब ए जाम डूबा न देना तुम।

मै मरीज ए इश्क तेरा मर्ज ताजा ही रहेने दो।

जलती आग मोहब्बत की बुझा न देना तुम।

देखा नही हुस्न तुझ सा सर से पाँव लबालब।

बिठा रखा सिर आंखो मुझे गिरा न देना तुम।

लिखा दिल पे नाम तेरा खून की रोशनाई से।

रौंदकर पैरो तले तेरा नाम मिटा न देना तुम।

इधर उधर जिधर नजर मगर कहाँ नही है तू।

चाहा टूटके तुझे तोड़के दिल भुला न देना तुम।

याद क्या करना तुझे भूलने की फुर्सत तो मिले।

गुजरे बगैर तेरे जिंदगी दिन दिखा न देना तुम।

चाँद तारे न मांगो झुका दूँ फलक कदमो तेरे।

मै ही तेरी जिंदगी गैर मांग सजा न लेना तुम।

नजर उठे सहर झुके तो शबब शाम हो जाये।

लहरा जुलफ़े बन घटा वर्षा भिंगा न देना तुम।

हाल दिल न पुछो मांग लो जान हँसके दे दु।

देख दिवानापन भारती अब मजा न लेना तुम।


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