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Fahima Farooqui

Inspirational Thriller

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Fahima Farooqui

Inspirational Thriller

घर

घर

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हमें ही नहीं सभी को घर चाहिए।

बारिश से भीगते परिंदे को शजर चाहिए।


फ़रिश्ते भी कहने लगे आमीन,

अब दुआ में तेरी वो असर चाहिए।


नींद न आना भी अमीरों की बीमारी है,

थके जिस्म को कहाँ बिस्तर चाहिए।


खूबियों कम नहीं है ज़माने में,

उन्हें देखने की बस नज़र चाहिए।



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