STORYMIRROR

Sanjay Saini

Abstract Tragedy Action

4  

Sanjay Saini

Abstract Tragedy Action

गांधार

गांधार

1 min
243

गहन तिमिर तमस तब गहराया

जब आतंकी परचम लहराया

असुरक्षित हो गए नारी अरुणार

जब हर सत् जन है घबराया


बीस वर्ष की कोशिशें नाकाम

होने दो कितना भी काम नायाब

हर प्रयास को करता है व्यर्थ

जब पड़ोस में हो नापाक पाक


कहते खुद को तुम तालिबान

पर क्या इतने भी समझे हो

तालिब होता है अभिलाषी

जनता का शोषण क्यूँ करते हो


अब पत्तन पर चलते हैं बम ओ गोले

बेघर हो गए हैं सब बच्चे भोले

जब उम्र है अपने कूचे में खेलो

पर बिना पलायन कैसे जी लो?

 

जहाँ नहीं सुरक्षित अब अमरीकन मरीन

बाकी सब का है क्या अस्तित्व

पुनः स्मरण करना होगा

इतिहास बदल कर बढ़ना होगा


केसर की इस धरती पे

रंग नूर क्या बदला है

गांधारी के गांधार में

क्या वो श्राप फिर उभरा है?


उस युग में कृष्ण ने उद्धार किया

इस युग में कौन बचाएगा

इस विकट संकट घडी में

जो संताप हर ले जायेगा


हमें ये चिंतन करना होगा

अपना परिपेक्ष्य बदलना होगा

कृष्ण को अगर आना भी होगा

अर्जुन को गांडीव उठाना होगा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract