एक प्यार ऐसा
एक प्यार ऐसा
मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,
जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .
मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,
मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,
मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,
उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है
तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,
राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,
मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,
उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .
ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं
इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,
जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,
मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,
खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .
मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,
तेरे इन गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,
मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,
खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .
मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी
ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,
मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,
तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है
मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,
जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .
मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,
मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,
मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,
उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है
तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,
राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,
मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,
उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .
ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं
इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,
जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,
मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,
खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .
मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,
तेरे इन गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,
मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,
खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .
मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी
ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,
मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,
तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है
एक प्यार ऐसा
जो बदले में कुछ नहीं खोजता
मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,
जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .
मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,
मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,
मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,
उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है
तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,
राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,
मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,
उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .
ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं
इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,
जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,
मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,
खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .
मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,
तेरे इनी गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,
मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,
खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .
मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी
ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,
मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,
तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है
मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,
जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .
मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,
मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,
मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,
उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है
तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,
राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,
मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,
उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .
ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं
इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,
जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,
मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,
खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .
मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,
तेरे इन गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,
मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,
खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .
मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी
ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,
मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,
तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है
एक प्यार ऐसा
जो बदले में कुछ नहीं खोजता
मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,
जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .
मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,
मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,
मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,
उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है
तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,
राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,
मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,
उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .
ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं
इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,
जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,
मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,
खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .
मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,
तेरे इनी गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,
मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,
खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .
मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी
ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,
मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,
तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है
मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,
जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .
मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,
मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,
मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,
उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है
तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,
राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,
मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,
उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .
ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं
इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,
जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,
मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,
खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .
मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,
तेरे इन गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,
मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,
खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .
मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी
ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,
मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,
तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है
एक प्यार ऐसा
जो बदले में कुछ नहीं खोजता
मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,
जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .
मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,
मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,
मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,
उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है
तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,
राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,
मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,
उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .
ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं
इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,
जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,
मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,
खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .
मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,
तेरे इनी गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,
मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,
खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .
मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी
ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,
मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,
तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है
मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,
जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .
मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,
मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,
मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,
उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है
तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,
राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,
मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,
उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .
ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं
इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,
जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,
मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,
खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .
मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,
तेरे इन गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,
मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,
खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .
मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी
ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,
मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,
तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है
एक प्यार ऐसा
जो बदले में कुछ नहीं खोजता
मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,
जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .
मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,
मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,
मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,
उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है
तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,
राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,
मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,
उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .
ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं
इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,
जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,
मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,
खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .
मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,
तेरे इनी गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,
मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,
खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .
मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी
ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,
मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,
तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है
मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,
जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .
मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,
मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,
मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,
उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है
तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,
राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,
मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,
उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .
ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं
इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,
जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,
मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,
खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .
मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,
तेरे इन गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,
मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,
खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .
मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी
ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,
मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,
तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है
एक प्यार ऐसा
जो बदले में कुछ नहीं खोजता
मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,
जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .
मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,
मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,
मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,
उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है
तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,
राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,
मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,
उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .
ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं
इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,
जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,
मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,
खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .
मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,
तेरे इनी गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,
मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,
खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .
मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी
ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,
मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,
तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है
मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,
जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .
मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,
मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,
मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,
उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है
तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,
राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,
मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,
उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .
ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं
इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,
जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,
मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,
खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .
मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,
तेरे इन गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,
मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,
खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .
मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी
ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,
मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,
तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है
एक प्यार ऐसा
जो बदले में कुछ नहीं खोजता
मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,
जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .
मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,
मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,
मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,
उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है
तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,
राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,
मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,
उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .
ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं
इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,
जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,
मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,
खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .
मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,
तेरे इनी गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,
मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,
खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .
मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी
ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,
मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,
तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है

