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Manjula Prasad

Romance

4  

Manjula Prasad

Romance

एक प्यार ऐसा

एक प्यार ऐसा

16 mins
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मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,

जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .

मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,

मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,

मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,

उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है

तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,

राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,

मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,

उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .

ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं

इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,

जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,

मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,

खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .

मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,

तेरे इन गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,

मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,

खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .

मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी

ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,

मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,

तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है
































मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,

जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .

मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,

मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,

मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,

उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है

तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,

राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,

मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,

उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .

ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं

इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,

जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,

मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,

खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .

मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,

तेरे इन गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,

मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,

खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .

मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी

ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,

मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,

तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है



एक प्यार ऐसा

जो बदले में कुछ नहीं खोजता


मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,

जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .

मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,

मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,

मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,

उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है

तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,

राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,

मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,

उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .

ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं

इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,

जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,

मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,

खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .

मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,

तेरे इनी गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,

मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,

खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .

मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी

ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,

मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,

तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है

















मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,

जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .

मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,

मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,

मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,

उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है

तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,

राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,

मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,

उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .

ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं

इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,

जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,

मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,

खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .

मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,

तेरे इन गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,

मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,

खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .

मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी

ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,

मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,

तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है



एक प्यार ऐसा

जो बदले में कुछ नहीं खोजता


मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,

जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .

मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,

मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,

मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,

उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है

तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,

राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,

मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,

उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .

ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं

इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,

जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,

मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,

खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .

मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,

तेरे इनी गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,

मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,

खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .

मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी

ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,

मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,

तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है

















मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,

जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .

मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,

मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,

मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,

उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है

तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,

राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,

मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,

उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .

ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं

इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,

जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,

मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,

खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .

मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,

तेरे इन गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,

मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,

खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .

मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी

ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,

मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,

तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है



एक प्यार ऐसा

जो बदले में कुछ नहीं खोजता


मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,

जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .

मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,

मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,

मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,

उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है

तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,

राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,

मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,

उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .

ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं

इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,

जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,

मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,

खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .

मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,

तेरे इनी गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,

मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,

खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .

मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी

ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,

मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,

तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है

















मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,

जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .

मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,

मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,

मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,

उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है

तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,

राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,

मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,

उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .

ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं

इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,

जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,

मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,

खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .

मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,

तेरे इन गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,

मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,

खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .

मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी

ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,

मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,

तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है



एक प्यार ऐसा

जो बदले में कुछ नहीं खोजता


मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,

जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .

मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,

मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,

मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,

उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है

तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,

राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,

मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,

उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .

ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं

इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,

जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,

मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,

खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .

मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,

तेरे इनी गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,

मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,

खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .

मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी

ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,

मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,

तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है

















मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,

जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .

मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,

मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,

मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,

उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है

तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,

राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,

मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,

उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .

ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं

इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,

जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,

मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,

खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .

मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,

तेरे इन गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,

मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,

खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .

मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी

ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,

मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,

तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है



एक प्यार ऐसा

जो बदले में कुछ नहीं खोजता


मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,

जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .

मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,

मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,

मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,

उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है

तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,

राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,

मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,

उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .

ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं

इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,

जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,

मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,

खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .

मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,

तेरे इनी गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,

मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,

खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .

मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी

ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,

मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,

तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है

















मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,

जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .

मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,

मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,

मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,

उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है

तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,

राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,

मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,

उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .

ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं

इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,

जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,

मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,

खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .

मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,

तेरे इन गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,

मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,

खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .

मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी

ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,

मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,

तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है



एक प्यार ऐसा

जो बदले में कुछ नहीं खोजता


मैंने अपने अंतर में तेरा प्यार छिपा लिया है ,

जीवन के अँधेरे हरने को ,एक चाँद चुरा लिया है .

मौसम हो चाहे बहारो का , या पतझड़ के अंगारो का ,

मुझको तो कोई गम ही नहीं , संग चमन का हो या वीरानो का ,

मैंने अपने अंतर में , एक फूल खिला लिया है ,

उसकी भीनी खुशबू से , नंदन वन सजा लिया है

तन्हाई के काले बादल , क्यों छुएँ मेरा आँचल ,

राहों के बिखरे कांटे , क्यों मुझे करे अब घायल ,

मैंने अपने अंतर में , एक दी प जला लिया है ,

उसकी उजली किरणों से , मैंने पूनम मना लिया है .

ग़म नहीं जो तुझको पा न सकी, हर प्यार की मंज़िल होती नहीं

इक उम्र मिले , या एक पल ही , चाहत ये कभी कम होती नहीं ,

जो दर्द जुदाई में मिलता , वो पीर कभी कम होती नहीं ,

मैंने अपने अंतर में ,तुझ संग संसार सजाया है ,

खोने पाने की हद्द से गुज़र , मुझमे ही तुझको पाया है .

मेरी साँसों में तू ही समाया है , मेरी धड़कन तेरे गीत सुनती है ,

तेरे इनी गीतों की धुन ही, मेरी ख़ामोशी दोहराती है ,

मैंने अपनी तन्हाई , तेरी यादो से सजा लिया है ,

खुद को मिटा दिया है ,पर तुझको पा ही लिया है .

मावस की काली राते ,या दिन की बोझिल ख़ामोशी

ये छीन न पाए मुझसे , तेरे प्यार की ये मदहोशी ,

मैंने अपने हर पल को , तुझ से ही सजा दिया है ,

तेरी यादो के संग जीने का अधिकार तो पा ही लिया है



















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