STORYMIRROR

A R Sahil

Romance

3  

A R Sahil

Romance

एक खामोश मुलाकात

एक खामोश मुलाकात

1 min
296

सोच रहा हूँ

तुम से एक बार मिलूँ

तुम से कुछ बातें करूँ

तुम से कुछ कहूँ

 

सामने तुम्हें बैठा कर

तुम्हारे गालों को अपने

हाथों की प्याली में सजा कर

तुम्हारे ललाट पर अपने

होठों का बोसा दे कर

तुम्हारे आँखों में कुछ देर

झाँक कर

फिर

तुम्हारे पैरो से लिपट कर

अपने चेहरे को तुम्हारे

गोद में छुपा कर

 

सोचता हूँ

तुमसे कुछ बातें करूँ

तुमसे कुछ कहूँ

 

अपनी हर ज्यादती की

अपनी हर उस आदत की

अपनी हर उस फितरत की

तुमसे तहे-दिल से माफ़ी मांगूँ

जो

तुम्हारे दिल को रुलाती है

 

तुमसे ये भी कहूँ कि

जानता हूँ

तुम माफ़ नहीं करोगी

और

माफ़ी माँगना मेरी फितरत

भी नहीं

फिर भी

तुमसे कहूँगा

 

तुम मुझे कभी माफ़

मत करना

पर

माफ़ कर दो

मेरी ख़ामोशी को

मेरी खुद से खुद की

नफरत को

क्या फर्क पड़ता है

और बताओ

और सुनाओ

हूँ

हाँ

सब ठीक है

मेरी इन सारी

डायलॉगों को

सब कुछ वर्ना कुछ भी नहीं

कि मेरे उसूलों को

 

सोचता हूँ

तुमसे जो कभी मिलूं

ये सारी बातें

तुम से कहूँ

 

पर क्या, मेरी खामोश

फितरत

मुझे तुमसे ये सारी

बातें कहने देगी

या फिर

आज की तरह

वो मुलाकात भी

एक खामोश मुलाकात

ही बन जाएगी.!!!!


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance