STORYMIRROR

Anjana Gupta

Inspirational

4  

Anjana Gupta

Inspirational

एक झलक ज़िन्दगी की....

एक झलक ज़िन्दगी की....

1 min
290

कहानी मेरी फिर से शुरू हुई है

कुछ वक़्त के बाद ज़िन्दगी की पहिए चली है

वक़्त के पहले इंतज़ार था बेहद

अब उस वक़्त के साथ इस वक़्त की इंतज़ार खत्म हुई है


आंखें भर चूंकी थी आसुओं से 

ख्वाब डूब चुके थे उन आसुओं में

आखिर अब किनारा मिल ही गया मेरे उन ख्वाबों को

और शायद गमों को थोड़ी राहत भी मिली है


कुछ वक़्त भूल गई थी मैं खुदको

अब शायद पहचान फिर बन रही है

गुमनाम हो गए थे ,महफ़िल में नाम मेरे 

अब शायद मशहूर फिर हो रही है


हां, ज़िन्दगी से थोड़ी नाराज़ थी मैं

सुकून वाली रात भी बेचैन थी मैं

अब शायद मेरी फिक्र ज़िन्दगी भी करने लगी

और यूं ही नहीं सारे शिकवे भुला कर

वो मुझे गले लगाने लगी है

और यूं ही नहीं सारे शिकवे भुला कर

वो मुझे गले लगाने लगी है


अब तो हौसलों के साथ ढूंढ रही हूं मंज़िल को

उड़ाने भर रही हूं बुलंदियों तक पहुंचने को

सफ़र के आगाज़ में रुकावट हो भी तो 

ये कदम रुकेंगे नहीं

और हम इसके सामने झुकेंगे नहीं

क्यूंकि लड़ाई अब किसी और से नहीं 

खुद की ही किस्मत से है

और किस्मत से हम हारेंगे नहीं


हां माना , ये होसले के पर्वत बादलों से टकराएंगे जरूर,

मगर टूटेंगे नहीं

अंजाम जो भी होगा

देख लिया जाएगा

मगर फिर से हम इस सफ़र में रुकेंगे नहीं

मगर फिर से हम इस सफ़र में रुकेंगे नहीं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational