STORYMIRROR

Surya Rao Bomidi

Inspirational

4  

Surya Rao Bomidi

Inspirational

बेऔलाद

बेऔलाद

1 min
267

चारों तरफ़ वृद्धाश्रमों की कतार लगने लगी है

वृद्धाश्रम के हर शख्स की अपनी कहानी है

किसी को बेटों ने छोड़ा है तो कोई खुद छूट गया है

कोई बेटा अपनों को साथ विदेश जाने को मनाया 


तो कोई ऐसा न कर सका जो पत्नी का सताया है

वाह री दुनियां तेरी पहेली कोई न जान पाया है

हम बेऔलाद ही सही पर एक बात तो है

न हमें खुशी है न गम की बेऔलाद हैं


क्योंकि हमें तो यहां आना ही था

यही सोचकर इस मन को कई बार बहलाया है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational